अनुबंध पत्र
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फॉर्मेट विवरण
यह अनुबंध पत्र format, जिसका format number उपलब्ध है, tra से संबंधित है।
उपलब्ध सुविधाएँ
इस पेज पर उपलब्ध फॉर्मेट को उपयोगकर्ता अपनी आवश्यकता के अनुसार online fill, edit, print और PDF download कर सकता है। यह सुविधा free use के लिए है और आवेदन, प्रार्थना पत्र, शपथ पत्र, एफिडेविट या अन्य दस्तावेज तैयार करने में मदद करती है। कचेहरी UP पर ऐसे कई उपयोगी format निशुल्क उपलब्ध हैं, जिन्हें कोई भी अपने काम के अनुसार उपयोग कर सकता है।
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अनुबंध पत्र
मै................................................ पुत्री....................................................... पता ग्राम/मोहल्ला-...................................................................................... थाना-......................... तहसील-.............................. जनपद-........................... की हूँ।
(आधार कार्ड संख्या-................................................)
.................प्रथम पक्ष
एवं
मै................................................... पुत्र....................................... पता ग्राम/मोहल्ला-........................................................................................................ थाना-..................................... तहसील-.................................. जनपद-................................. का हूँ।
(आधार कार्ड संख्या-........................................................)
.............द्वितीय पक्ष
हम उभयपक्षकार खूब सोच समझकर निम्न शर्तों के अनुसार बिना किसी जोर दबाव के निम्नलिखित पाबन्द होते हैं :-
1- यह कि प्रथम पक्ष (पत्नी) ने अपनी स्वतंत्र इच्छा, बिना किसी दबाव, जोर-जबरदस्ती या लालच के, द्वितीय पक्ष (पति) के साथ निकाह करके पति पत्नी के रूप में साथ साथ रह रहे है। वह बालिग है और अपनी भलाई-बुराई को भली-भांति समझती है। प्रथम पक्ष की पूर्ण सहमति व मर्जी एवं स्वेच्छा से पर अनुबंध पत्र पूर्णतः आपसी सहमति से निष्पादित हुआ है।
2- यह कि द्वितीय पक्ष (पति) भी बालिग, विवेकशील और स्वतंत्र इच्छा का मालिक है। उसने भी यह विवाह बिना किसी दबाव, डर, या धोखे के, पूर्णतः स्वेच्छा से किया है। यह विवाह शरीयत और कानून के अनुसार किया गया है।
3- यह कि दोनों पक्ष एक-दूसरे से प्रेम करते हैं और अपने प्रेम को वैवाहिक संबंध में बदलकर, शरीयत के अनुसार पति-पत्नी के रूप में जीवन व्यतीत करने को तैयार हुए हैं।
4- यह कि दोनों पक्षों ने यह अनुबंध पत्र पढ़वाकर, गवाहों की उपस्थिति में किया है। निकाह शरीयत के अनुसार संपन्न होगा।
5- यह कि विवाह के समय दोनों पक्षों की मानसिक स्थिति सामान्य थी, और वे किसी भी मानसिक या शारीरिक रोग से ग्रसित नहीं थे जिससे विवाह असमर्थ हो।
6- यह कि प्रथम पक्ष ने अपनी इच्छा से अनुबंध पत्र के समय किसी प्रकार की कोई शर्त नहीं रखी।
7- यह कि द्वितीय पक्ष ने भी प्रथम पक्ष के प्रति किसी प्रकार का छल, धोखा या झूठ नहीं बोला तथा सभी बातें स्पष्ट रूप से अनुबंध पत्र पूर्व बता दी गई थीं।
8- यह कि दोनों पक्ष अब पति-पत्नी के रूप में एक साथ सम्मानपूर्वक
, स्नेहपूर्वक एवं पारिवारिक वातावरण में निवास कर रहे हैं। वे समाज के सभी रीति-रिवाजों का पालन करते हुए एक आदर्श दांपत्य जीवन जीने का प्रयास करेंगे।
9- यह कि द्वितीय पक्ष, प्रथम पक्ष की सभी जरूरतों को पूरा करने हेतु कटिबद्ध है और उसकी आर्थिक, मानसिक एवं सामाजिक सुरक्षा हेतु जिम्मेदार रहेगा।
10- यह कि प्रथम पक्ष, द्वितीय पक्ष की धार्मिक, पारिवारिक और सामाजिक मर्यादाओं का पालन करते हुए, एक आदर्श पत्नी की तरह जीवन यापन करेगी।
11- यह कि दोनों पक्ष यह स्वीकार करते हैं कि वे एक-दूसरे के प्रति वफादार रहेंगे तथा किसी भी तरह की बेवफाई, धोखा या विवाहेतर संबंध नहीं रखेंगे।
12- यह कि प्रथम पक्ष को द्वितीय पक्ष की चल-अचल संपत्ति में वैधानिक अधिकार प्राप्त होगा।
13- यह कि इस विवाह से उत्पन्न होने वाली संतानें वैधानिक रूप से दोनों पक्षों की संतानें मानी जाएंगी और उन्हें पिता की संपत्ति में शरीयत अनुसार उत्तराधिकार प्राप्त होगा।
14- यह कि संतान के पालन-पोषण, शिक्षा, चिकित्सा एवं विवाह संबंधी जिम्मेदारी प्रमुख रूप से द्वितीय पक्ष की होगी, जो अपनी सामर्थ्य अनुसार उसे निभाएगा।
15- यह कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की भावनाओं, इच्छाओं और धार्मिक विश्वासों का सम्मान करेंगे और किसी प्रकार का जबरदस्ती का व्यवहार नहीं करेंगे।
16- यह कि विवाह के बाद यदि भविष्य में दोनों पक्षों के मध्य कोई मतभेद उत्पन्न होता है, तो उसका समाधान पहले आपसी बातचीत से किया जाएगा।
17- यह कि यदि आपसी बातचीत से समाधान न हो सके, तो परिवारजनों की मध्यस्थता से समाधान किया जाएगा। यदि यह भी मुमकिन न हो फिर जरिये अदालत से किया जायेगा।
18- यह कि यदि द्वितीय पक्ष, प्रथम पक्ष को मानसिक, शारीरिक अथवा आर्थिक रूप से प्रताड़ित करता है, तो प्रथम पक्ष को विधिक सहायता प्राप्त करने का पूरा अधिकार होगा।
19- यह कि यदि प्रथम पक्ष, द्वितीय पक्ष के साथ असम्मानजनक व्यवहार करती है, घर छोड़ देती है या धर्म एवं शरई आदेशों का उल्लंघन करती है, तो वह मेहर व गुजारा भत्ता से वंचित हो सकती है।
20- यह कि दोनों पक्ष यह स्वीकार करते हैं कि उन्होंने यह निकाह शरीयत के अनुसार किया है और इस्लामिक क़ानूनों का पालन करते हुए जीवन बिताएंगे।
21- यह कि विवाह के बाद प्रथम पक्ष को अपने मायके आने-जाने की स्वतंत्रता होगी, लेकिन यह आपसी सहमति और मर्यादा के अंतर्गत होगी।
22- यह कि द्वितीय पक्ष को भी अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए, पत्नी को समय और सम्मान देना अनिवार्य होगा।
23- यह कि कोई भी पक्ष अपने निजी क्रोध या पारिवारिक तनाव को विवाह संबंध पर हावी नहीं होने देगा और संयमपूर्वक व्यवहार करेगा।
24- यह कि यदि किसी भी पक्ष को ऐसा प्रतीत होता है कि विवाह संबंध निभाना कठिन हो गया
है, तो वे पहले सामाजिक-सुलह की प्रक्रिया अपनाएंगे।
25- यह कि यदि सुलह संभव न हो, तो शरीयत और भारतीय कानूनों के अनुसार उचित विधिक प्रक्रिया द्वारा तलाक की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
26- यह कि कोई भी पक्ष तलाक देने या लेने के लिए एक-दूसरे पर झूठे आरोप नहीं लगाएगा और सत्यता व साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेगा।
27- यह कि दोनों पक्षों को अपने धार्मिक अधिकारों का पालन करने की पूरी स्वतंत्रता होगी। कोई भी पक्ष दूसरे के धार्मिक कर्तव्यों में बाधा नहीं बनेगा।
28- यह कि इस अनुबंध पत्र के माध्यम से दोनों पक्ष यह प्रमाणित करते हैं कि वे वास्तव में पति-पत्नी हैं और उनका विवाह शरीयत के अनुसार वैध होगा।
29- यह कि यह घोषणा-पत्र न्यायालय, पुलिस विभाग या किसी अन्य वैधानिक संस्था में प्रमाण हेतु प्रस्तुत किया जा सकता है।
30- यह कि यह घोषणा-पत्र दोनों पक्षों की स्वतंत्र इच्छा से, बिना किसी मानसिक दबाव, डर या प्रलोभन के तैयार किया गया है।
31- यह कि दोनों पक्ष इस घोषणा-पत्र को कानूनी दस्तावेज़ मानते हैं और इसके प्रत्येक बिंदु को पढ़कर, समझकर उस पर सहमति जताते हैं।
32- यह कि इस दस्तावेज़ को तैयार करने के लिए दोनों पक्षों ने दो स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए हैं, जिनकी पहचान सत्यापित है।
33- यह कि इस विवाह की सूचना दोनों पक्षों के परिजनों को दे दी गई है और उन्हें इस विवाह पर कोई आपत्ति नहीं है या दी गई आपत्ति पर विचार करते हुए विवाह किया गया है।
34- यह कि यह विवाह दोनों पक्षों की मर्यादा, गरिमा और सामाजिक पहचान की रक्षा करते हुए किया गया है।
35- यह कि यदि कोई भी पक्ष इस घोषणा-पत्र की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो दूसरा पक्ष विधिक कार्यवाही का हकदार होगा।
अतएवं उभय पक्ष स्वेच्छा पूर्वक उपरोक्त वर्णित शर्तों के पाबन्द रहते हुए यह अनुबन्ध पत्र समक्ष गवाहान लिख दिया ताकि सनद रहे समय पर काम आवे।
दिनांक-
ह० प्रथम पक्ष
ह०द्वितीय पक्ष
हस्ताक्षर व नाम पता गवाहान :-
1-....................................
2-....................................
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